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Thursday, 24 January 2013

जानिये कौन हैं श्री राजीव दीक्षित


जानिये कौन हैं श्री राजीव दीक्षित

 


आजादी बचाओ आन्दोलन के प्रणेता एवं भारत स्वाभिमान के राष्ट्रीय सचिव श्री राजीव दीक्षित का जन्म एक क्रांतिकारी परिवार मे 30 नवम्बर 1967 को उत्तरप्रदेश के नहा गाँव मे हुआ , उन्होंने इलाहाबाद से बीटेक एवं कानपुर से एमटेक किया । वह एक वैज्ञानिक थे , उन्होने श्री ए पी जे अब्दुल कलाम जी से साथ भी काम किया , उन्होने फ़्रांस मे दूर संचार क्षेत्र मे भी काम किया । बचपन से वे भगतसिंह,चंद्रशेखर आज़ाद ,सुभासचन्द्र बोस, गांधीजी के जीवन चरित्र को पढ़ते थे और उनके विचार से बहोत प्रभावित हुए , जिस तरह चन्द्र शेखर आज़ाद ब्रिटिश और अँग्रेजी संस्कृति से पूरी तरह मुक्त भारत चाहते थे , वैसे ही राजीव भाई ने आजाद देश को इन विदेशी मल्टीनेशनल कंपनीयो का फिरसे ग़ुलाम न बनेने के लिए सम्पूर्ण स्वदेशी का आंदोलन छेड़ा । इन विदेशी कंपनियो के जीरो टेक्नालजी उत्पादनो के खिलाफ अभियान छेड़ा और लोगो को अवगत कराया की देश के गरीब तबके को पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनी के बदले सहकारी कंपनी के द्वारा बनायीं गयी देशी उत्पादों का उपयोग करना अत्यधिक तार्किक है । उन्होने आजादी बचाओ आंदोलन संस्था की स्थापना की । यह संस्था देशभर मे विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के उपभोक्ता सामग्री के क्षेत्र में प्रवेश का विरोध करती रही । इसके अलावा उन्होने भारत में पाश्चात्य संस्कृति के दुष्प्रभावों के प्रति भी लोगों को सचेत कराया । उन्होने नई आजादी उद्घोष नामक एक पत्रिका भी निकाली , इसके अतिरिक्त वे देशभर मे भ्रमण करते रहे और विभिन्न आर्थिक – सामाजिक विषयो पर व्याख्यान करके लोगो मे एक वैचारिक क्रांति की ज्योत जलायी । उनके मुख्य व्याख्यान के विषय रहे अंग्रेजी भाषा की ग़ुलामी , अंतर्राष्ट्रीय संधियों के मकडजाल में फंसा भारत , भारत का सनाकृतिक पतन , भारत का स्वर्णिम अतीत , भारत की विश्व को देन, भारत निर्माण योजना , एतिहासिक भूलें , मांसाहार से हानियाँ , मौत का व्यापार , संगठन की मर्यादा एवं सिद्धांत , संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता , स्वाभिमान सन्देश , स्वदेशी से स्वावलंबी भारत , विष मुक्त कृषि , व्यवस्था परिवर्तन की क्रांति । अपने इस व्याख्यान से राजीव भाई ने देश के हर वर्ग के नागरिक को आह्वान किया की वे युग की इस सबसे बड़ी सामाजिक, आध्यात्मिक व राष्ट्रीय क्रान्ति से जुड़कर एक स्वस्थ एवं शक्तिशाली भारत बनाने के लिए व देश का खोया हुआ स्वाभिमान जगाने के लिए आगे आयें । उनकी आवाज में वेदना थी | उन्होंने स्वदेशी के माध्यम से देशसेवा का जो बीड़ा उठाया था , इस महायज्ञ में विघ्न न पड़े इसलिये उन्होंने विवाह नहीं किया और आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत का पालन किया । वे अपने हाथ से काती खादी का कुर्ता पैजामा धारण करते थे ।
राजीवजी की ही विचार शक्ति थी जिसने श्रधेय बाबा राम देव को आंदोलित किया और राजीव जी ने बाबा राम देव के साथ जुड़ कर इस कार्य को एक नयी दिशा और गति दी । बाबा रामदेव जी के भारत स्वाभिमान ट्रस्ट मे राष्ट्रिय प्रवक्ता और सचिव का पद संभाला । स्वदेशी के नारे के साथ साथ उन्होने भारत मे बढ़ते भ्रष्टाचार , बेईमानी , हिंसा , अपराध से मुक्त स्वस्थ, समृध्द, संस्कारवान भारत के निर्माण का स्वप्न सँजोया । गहन दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है वे समृद्धि एवं खुशहाल भारत बनाने के सपनों को आधे सफर में छोड़कर हमसे दूर चले गए , श्री राजीव दीक्षित जी का निधन ३०-११-२०१० रात्रि लगभग दो बजे भिलाई सेक्टर ९ के हास्पिटल मे हिरदय घात के होने के बाद हो गया , श्री राजीव भाई जो एक एक पल देश के लिये जिते थे जिनके तन मे, मन मे, हृदय मे, प्राण मे देश प्रेम ईतना प्रखर था की अपना पुरा बचपन, अपनी पुरी जवानी, अपना पुरा जीवन राष्ट्र के लिये अर्पित कर दिया। राजीव दीक्षित ज्ञान के अथाह भंडार थे। उनकी बौद्धिक क्षमता के कारण उन्हें चलता-फिरता ज्ञान कोष भी कहा जाता था। इतनी छोटी सी आयु में राजीव दीक्षित ने जो विचारों की जो गंगा बहाई ऐसी शक्ति बहुत कम लोगो में होती है , शहीदों का दर्द लिए माँ भारती का लाल स्वर्णिम भारत, पूर्ण स्वराज्य की नीव रखकर चैतन्य चेतना मे विलुप्त हो गया| विश्वास नहीं होता की वे हमारे बीच मे नहीं है . देश ने उच्चकोटि का एक देशभक्त और अद्भुत वक्ता खो दिया . आइये हम सब भाई राजीव जी के बताये हुए मार्ग पर चलते हुए संकल्प ले की माँ भारती की बेडियो को काटने के लिए अपने तन मन धन को अर्पित कर देंगे यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी इस वीर सपूत को|
उनका संकल्प, विचारधारा, सिद्धांत, मार्गदर्शन हर भारतीय नागरिक के हिरदय मे प्रज्वलित है भारत का हर युवा नागरिक उनके सपनों को मन मे संजोये हुए उनके संकल्प को पूरा करेगा . आइये हम परम परमात्मा से प्रार्थना करे की हमें भी अवसर देना हम अपने शरीर का सर्वोच्च बलिदान मा भारती के चरणों मे चढ़ा सके । एक स्वस्थ , समृध्द, स्वावलंबी, संस्कारवान एवं शक्तिशाली भारतका श्री राजीवभाई का सपना पूरा करे , यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी । स्वामी रामदेव ने कहा है कि ऐसी राष्ट्रभक्त आत्माएं जब तक अपना काम पूरा नहीं कर लेती बार बार धरती पर आती हैं । स्वामी रामदेव जी ने 30 नवंबर को स्वदेशी दिवस घोषित किया है । हम पूरे साल स्वदेशी दिवस मानायेंगे और जीरो टेकनीक वाली किसी विदेशी वस्तु का इस्तेमाल नहीं करेंगे!
राजीव भाई के अंतिम क्षणो की घटना छत्तीसगढ़ राज्य मे भाई राजीव दीक्षित जी का उड़ीसा से प्रवेश रायगढ़ जिले मे तारीख २६-११-२०१० को हुआ जहा उन्होंने दो जन सभाओ को संबोधित किया, इसके बाद जांजगीर जिले मे तारीख २७-११-२०१० को दो विशाल जन सभाएं करी २८-११-२०१० को बिलासपुर की जन सभाओ को पूरा करते हुए वे २९-११-२०१० को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले मे पहुचे| उनके साथ छत्तीसगढ़ राज्य के राज्य प्रभारी भाई आचार्य दयासागर जी तथा अन्य पदाधिकरी पल पल साथ थे, दुर्ग जिले मे उनकी दो विशाल जन सभाए आयोजित थी, पहली जन सभा तहसील बेमेतरा मे कार्यक्रम सुबह दस बजे से लेकर एक बजे तक चला राजीव दीक्षित जी ने विशाल जन सभा को संबोधित किया| इसके बाद का कार्यक्रम सायं ४ बजे से जिला दुर्ग मे निश्चित था जिसको संबोधित करने के लिए दिन के २ बजे भाई राजीव दीक्षित जी बेमेतरा तहसील से रवाना हुए, रास्ते मे ही गाड़ी मे उनका शारीर पसीने पसीने हो गया आचार्य जी ने उनसे पूछा तो जवाब मिला कि मुझे गैस ऊपर की तरफ चढ़ गयी है आचार्य जी तुरंत उन्हें अपने दुर्ग के अपने कार्यालय मे ले गए जहा पर होम्योपथी डॉ को बुलाकर उन्हें दवाई दिलवाई गयी जिससे उन्हें कुछ फायदा हुआ| थोड़ी देर बाद वे हजात के लिए शौचालय मे गए जहा काफी देर के बाद भी उनके नहीं निकालने पर दरवाजा खोला गया तो वह पसीने से लथ पथ सीट पे बैठे हुए मिले उन्हें तुरंत सेक्टर ९ भिलाई इस्पात संयंत्र के अस्पताल मे भर्ती कराया गया|
डाक्टरों ने घोषित किया की भाई राजीव दीक्षित जी को ह्रदय घात हुआ है, उन्हें तुरंत अस्पताल मे भर्ती कराया गया जबकि वे एलोपेथी चिकित्सा के लिए मना करते रहे उनका मनोबल इतना दृढ था की वे अस्पताल मे भर्ती नहीं होना चाहते थे उनका कहना था की मैंने जीवन भर इस चिकित्सा को नहीं लिया है तो अब कैसे ले लूँगा| बहुत समझाने पर स्वयं परम पूजनीय स्वामी रामदेव महाराज जी ने टेली फ़ोन पर भाई राजीव दीक्षित से वार्तालाप करते हुए उन्हें स्थिति की गंभीरता को समझाया| आखिर मे वे आइ सी यु मे एक बड़ी डॉ के टीम के निरक्षण मे भर्ती कराये गए, दुर्ग की बहन डॉ रेखा मित्तल जो की हमारी कार्पोरेट मेम्बर भी है पल पल उनके साथ गहन चिकित्सा कक्ष मे उपस्थित थी| विधाता की नियति के आगे किसी का जोर नहीं चला रात्रि २ बजे तारीख ३०-११-२०१० को भाई राजीव दीक्षित जी का शरीर शांत हो गया|
समाचार सुनते ही हम सब सकते मे आ गए सभी जगह यह दुखद समाचार प्रसारित किया गया, भाई राजीव दीक्षित जी के छोटे भाई वर्धा से सुबह ४ बजे भिलाई अस्पताल मे पहुच गए, पूजनीय स्वामी जी लगातार निरंतर रात भर डोक्टरो के संपर्क मे थे| राजीव जी के मृत्यु का समाचार अघात बनकर स्वामी जी को लगा जिसका वर्णन स्वामी जी ने सुबह के निशुल्क शिकोहाबाद योग शिविर मे किया| छत्तीसगढ़ के सभी नागरिक शोकाकुल हो गए हजारो की भीड़ ने माँ भारती के इस सपूत को भाव भीनी श्रद्धांजलि अर्पित करी, आश्रु पूर्ण नेत्रों से उनके पार्थिव शरीर को ११ बजे रायपुर माना हवाई अड्डे पर विदाई दी गयी जहा से यह शव हरिद्वार पतंजलि योग पीठ ले जाया गया, १-१२-२०१० को सुबह ११ बजे उनकी अंत्येसटी कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
हरेश पताणी आर्य

साभार – क्रांति4 पीपुल. कॉम